बाजार में पिछले एक-दो दिनों से चर्चा गर्म थी की 22 दिसंबर से कैश सेगमेंट वाले शेयरों में
शॉर्ट सेलिंग पर रोक लग जाएगी। कई व्हाट्सएप समूहों में इस तरह के मैसेज शेयर किए जाने
लगे थे।

बात इतनी बढ़ी की मार्केट रेगुलेटर सेबी को रविवार के दिन भी एक प्रेस रिलीज जारी करनी पड़ी
सेबी ने साफ किया है कि इस शॉर्ट सेलिंग से जुड़े नियमों को किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया
जा रहा है। इस तरह की खबरें भ्रामक हैं।

सेबी का कहना है कि शॉर्ट सेलिंग से जुड़ा मौजूदा फ्रेमवर्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में ये
कहना कि कल से शॉर्ट सेलिंग के कोई नियम बदल रहे हैं, बिल्कुल गलत है।

क्या है शॉर्ट सेलिंग के नियम?

वायदा में शामिल इंडेक्स और शेयरों में ट्रेडर पहले बिकवाली के सौदे यानी शॉर्ट पोजिशन ले सकते हैं। भाव नीचे आने पर उन्हें फायदा और भाव ऊपर जाने पर नुकसान होता है।

कैश सेगमेंट में शामिल शेयरों में पोजिशनल शॉर्ट सेलिंग नहीं की जा सकती है। हां इंट्रा-डे में शॉर्ट सेल किया जा सकता है, लेकिन बाजार बंद होने पर शॉर्ट पोजिशन कवर करनी जरूरी है। अगर शॉर्ट पोजिशन कवर नहीं की तो डिलिवरी शॉर्ट हो जाती है। वैसे इसकी नौबत कम ही आती है, ब्रोकर खुद 3.20 तक आपकी शॉर्ट पोजिशन काट देता है।

बाजार में अफवाह थी कि सोमवार से कैश में शॉर्ट सेलिंग इंट्राडे में भी बंद हो जाएगी। लेकिन सेबी ने इन खबरों का पूरी तरह खंडन कर दिया है।

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